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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 11
विक्षेपाग्राल्लिखेद्‌ वृत्तं ग्राहकार्धन तेन यत्‌ । ग्राह्मवृत्तं समाक्रान्तं तदुग्रस्तं तमसा भवेत्‌ ॥
छादकबिम्ब के मानार्ध तुल्य व्यासार्ध से निर्मित वृत्त ग्राह्मवेत्त जितना आवृत होगा उतना भाग छादकबिम्ब से आच्छादित होगा।
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