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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 6 • श्लोक 1
छेद्यक प्रयोजनम्‌ न छेद्यकमृते यस्माद भेदा ग्रहणयो: स्फुटा: । ज्ञायन्ते तत प्रवक्ष्यामि च्छेद्यकज्ञानमुत्तमम्‌ ॥
छेद्यक के बिना सूर्यचन्द्र के ग्रहण के भेद अर्थात्‌ स्पर्श मोक्ष सम्मीलन ग्रास आदि के भेद स्पष्ट ज्ञात नहीं होते इसलिये उस उत्तम छेद्यक ज्ञान को कह रहा हूँ।
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