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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 9
मध्य लग्नाधिके भानौ तिथ्यन्तात्‌ प्रविशोधयेत्‌ । धनमूनेडसकृत्‌ कर्म यावत्‌ सर्व स्थिरीभवेत्‌ ॥
मध्यलग्न अर्थात्‌ त्रिभोनलग्न से सूर्य अधिक हो तो दर्शान्तकाल में लूम्बन को हीन करना चाहिये यदि त्रिभोन लग्न से सूर्य न्‍्यून हो तो दर्शान्तकाल में छृम्बन को धन करना चाहिये। लम्बन संस्कृत दर्शान्त काल से पुन: पुन: तब तक लम्बन आदि सम्पूर्ण गणित करें। जब तक लम्बन आदि स्थिर न हो जाय अर्थात्‌ पूर्व तुल्य न हो जाय। इस प्रकार साधन किया हुआ स्थिरीभूत दर्शान्‍न्तकाल स्पष्ट दर्शान्तकाल होता है।
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