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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 8
मध्यलग्नाक विश्लेषज्या छेदेन विभाजिता । रवीन्द्वो्लम्बन ज्ञेयं प्राकपश्चाद्‌ घटिकादिकम्‌ ॥
एक राशिज्या के वर्ग में दृग्गतिज्या का भाग देने से लब्धि छेदसंज्ञक होती है। त्रिभोन लग्न और सूर्य के अन्तरांशों की ज्या में छेद का भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो वह त्रिभोनलग्न से पूर्वापर भाग में सूर्य-चन्द्र का घटिकादि लम्बन होता है।
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