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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 6
मध्यज्यावर्ग विश्लिष्टं दृकक्षेप: शेषत: पदम्‌ । ततत्रिज्यावर्गविश्लेषान्मूलं शंकु: स दृग्गति: ॥ नतांशबाहु कोटिज्ये स्फुटे दृक॒क्षेपदृग्गती ।
उसके वर्ग को मध्यज्या के वर्ग में घटाकर शेष का वर्गमूल लेने से दृक्‌क्षेप होता है। टूक॒क्षेप के वर्ग को त्रिज्यावर्ग में घटाकर शेष का वर्गमूल लेने से दृग्गतिसंज्ञक शंकु होता है।
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