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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 3
अग्रासाधनम्‌ लग्न पर्वान्तनाडीनां कुर्य्यात्‌ स्वैरुदयासुभि: । तज्ज्याउन्त्यापक्रमज्याध्नी लम्बज्याप्तोदयाभिधा ॥
पर्वान्तकाल में स्वदेशीय उदयासुओं द्वारा लग्न साधन करना चाहिये। तदनन्तर उसकी ज्या को परमक्रान्तिज्या से गुणाकर लम्बज्या से भाग देने पर लब्धि उदय संज्ञिका लग्न की अग्रा होगी।
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