देश और काल के अनुसार जिस प्रकार नति का सम्भव और त्रिभोनलग्न के पूर्वापर दिशा के अनुरोध से देशकाल विशेष से जैसे लम्बन उत्पन्न होता है उसका विवेचन करने जा रहा हूँ।
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