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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 16
तदा मोक्षस्थितिदके देय प्राग्रहणे तथा । हरिजान्तरकं॑ शोध्य यत्रैतत्‌ स्याद्‌ विपर्यय: ॥
पूर्वकपाल में मध्यकालिकलम्बन से स्पाशिकलम्बन अधिक और मौक्षिकलम्बन न्यून हो अथवा पश्चिमकपाल में मध्यलम्बन से स्पाशिकलंबन न्यून हो तथा मौक्षिकलंबन अधिक हो तो स्पाश्शिकलंबन और मध्यलंबन का तथा मध्यलूंंबन और मोक्षऊंबन का अन्तर क्रम से स्पर्शस्थित्यर्ध और मोक्षस्थित्यर्ध में जोड़ना चाहिए।
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