तिथ्यन्त अर्थात् गणितागत दर्शान्तकाल में स्पर्शकालिक स्थित्यर्ध घटाकर तथा मोक्ष कालिक स्थित्यर्ध जोड़कर “एकज्यावर्गतश्छेद' इत्यादि प्रकार से असकृत् स्पाशिकलम्बन और मौक्षिक लम्बन का साधन करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।