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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 15
प्राककपालेडधिक मध्यांद्‌ भवेत्‌ प्राग्रहणं यदि । मौक्षिक लम्बनं॑ हीनं, पश्चार्थे तु विपर्यय: ||
तिथ्यन्त अर्थात्‌ गणितागत दर्शान्तकाल में स्पर्शकालिक स्थित्यर्ध घटाकर तथा मोक्ष कालिक स्थित्यर्ध जोड़कर “एकज्यावर्गतश्छेद' इत्यादि प्रकार से असकृत्‌ स्पाशिकलम्बन और मौक्षिक लम्बन का साधन करना चाहिए।
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