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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 14
स्थितिविमर्दार्धयो: वैशिष्ट्यम्‌ स्थित्यर्धोनाधिकात्‌ प्राग्वत्‌ तिथ्यन्ताल्लम्बनं पुनः। ग्रासमोक्षोद्भव॑ साध्य तन्मध्यहरिजान्तरम्‌ ॥
मानैक्यखण्ड के वर्ग में स्पष्टशर का वर्ग घटाकर मूल लेने से स्थित्यर्धकला होती हैं | इसको ६० से गुणाकर सूर्य-चन्द्र की गत्यन्तर कला से भाग देने से घटिकादिक स्थित्यर्ध होता है।
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