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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 13
स्पष्टनतिप्रयोजनम्‌ तया स्थितिविमर्दार्धग्रासाद्यं तु यथोदितम्‌ । प्रमाणं बलनाभीष्टग्रासादि हिमरश्मिवत्‌ ॥
नति संस्कृत स्पष्टशर से चन्द्रग्रहणोक्त प्रकार से स्थित्यर्ध, मर्दार्ध, ग्रास, क्‍ सम्मीलन, उनन्‍्मीलन, वलन, इष्टपग्रास आदि का साधन करना चाहिए।
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