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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 11
दृकक्षेपात्‌ सप्ततिहताद भवेद्वाइ्वनति: फलम्‌ । अथ वा त्रिज्यया भक्‍्तात्‌ सप्त सप्तकसंगुणात्‌ ॥
दृक॒क्षेप में ७० का भाग देने से अथवा दृक॒क्षेप को ४९ से गुणाकर त्रिज्या का भाग देने से फल कलादि नति होती है।
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