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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 10
नतिसाधनम्‌ दृकक्षेप: शीततिग्मांश्वोर्मध्य भुक्त्यन्तराहत: । तिथिघ्नत्रिज्यया भकतो लब्धं साध्वनतिर्भवेत्‌ ॥
दृक॒क्षेप को सूर्यचन्द्र के गत्यन्तर से गुणाकर १५ से गुणित त्रिज्या से भाग देने पर लब्धि कलादि नति होती है।
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