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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 5 • श्लोक 1
लम्बननत्योरभावनिर्णय : मध्यलग्नसमे भानौ हरिजस्य न सम्भव: । अक्षोदड्मध्यभक्रान्तिसाम्यपे नावनतेरपि ॥
व्रिभोनलग्न के तुल्य रवि होने पर (खमध्य में) लम्बेन का अभाव होता है। अक्षांशों के और मध्यलग्न अर्थात्‌ दशम लग्न वा त्रिभोनलग्न के उत्तर क्रान्त्यंशों के समान होने पर (क्षितिज पर) नति का अभाव होता है। (अमान्तकालिक लग्न में तीन राशि घटाने से त्रिभोनलग्न होता है)।
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