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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 6
पर्वसम्भावना ः भानोर्भार्धे महीच्छाया तत्तुल्येडर्कसमेऊपि वा । शशाड्डपाते ग्रहणं कियद्भागांधिकोनके ॥
सूर्य से ६ राशि के (१८०) अन्तर में भूछाया भ्रमण करती है। सूर्य के तुल्य अथवा छ: राशि युक्त रवि (सषड्भसूर्य) के तुल्य या उससे कुछ न्यूनाधिक अंशों पर चन्द्रपात होने से ग्रहण होता है।
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