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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 26
शरस्याडगुलात्मकी करणम्‌ सोन्नतं दिनमध्यर्धं दिनार्धाप्तं फलेन तु । छिन्द्याद् विक्षेपमानानि तान्येषामंगुलानि तु ।। ॥ सूर्यसिद्धान्ते चन्द्रग्रहणाधिकार: सम्पूर्ण: ॥
दिनमान, दिनार्धभान और उन्नत घटिकाओं के योग में दिनमान के आधे का भाग देने से जो फल प्राप्त हो उससे पूर्व साधित विक्षेपादिकों में भाग देने से लब्ध फल उन विक्षेपादिकों के अंगुलादि मान होते हैं।
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