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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 25
राशित्रययुताद्‌ ग्राह्मात्‌ क्रान्त्यंशैर्दिक्समैर्युता: । भेदेषन्तराज्ज्य वलना सप्तत्यंगुलभाजिता ॥
सत्रिभ (तीन राशि युक्त) ग्रह की क्रान्ति के तुल्य आयनवलन होता है। इन दोनों की एक दिशा होने पर योग तथा भिन्‍नदिशा होने पर अन्तर करने से फल स्पष्टवलन होता है। स्पष्टवलनज्या में ७० का भाग देने से अंगुंछादि वलन होता है।
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