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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 24
वलनसाधनम्‌ नतज्याऊक्षज्ययाभ्यस्ता त्रिज्याप्ता तस्य कार्मुकम्‌ । वलनांशा: सौम्ययाम्या: पूर्वापरकपालयो: ॥
सूर्यग्रहण में सूर्य की नतकालज्या को तथा चन्द्रग्रहण में चन्द्र की नतकालज्या को स्वदेशीय अक्षज्या से गुणाकर त्रिज्या से भाग देने से प्राप्त लब्धि का चाप पूर्व-पश्चिम नतज्या के क्रम से उत्तर-दक्षिण आक्षवलन होता है।
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