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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 23
कोटिलिप्ता रवे: स्पष्टस्थित्यर्थेनाहता हता:। द मध्येन लिप्तास्तन्‍ननाडय: स्थितिवद्‌ ग्रासनाडिका: ॥
सूर्यग्रहण में इस प्रकार से प्राप्त कोटिकला को स्पष्टस्थित्यर्ध से गुणाकर मध्यस्थित्यर्ध का भाग देने से प्राप्त लब्धि स्पष्ट कोटिकला होती है। इन कोटिकलाओं को ६० से गुणाकर सूर्य-चन्द्र के गत्यंतर का भाग देने से प्राप्त घटिकादि लब्धि स्वकीय स्थित्यर्ध में घटा देने से शेष इष्टग्रास घटिका होती है।
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