भुज अर्थात् तात्कालिक शर तथा पूर्वोक््त प्रकार से साधन की हुई कोटि इन दोनों के वर्गयोग का वर्गमूल कर्ण होता है इस कर्ण को मानैक्यार्ध में घटाने से इष्टकालिक ग्रासमान होता है।
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