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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 18
इष्टग्रासानयनम्‌ इष्टनाडीविहीनेन स्थित्यर्धेनाकचन्द्रयो: । भुक्त्यन्तरं समाहन्यात्‌ षष्ट्याप्ता: कोटिलिप्तिका: ॥
इष्ट घटयादिमान को स्पर्शस्थित्यर्ध घट्यादि में घटाने से जो शेष रहें उनको सूर्य-चन्द्र के गत्यन्तर से गुणाकर ६० का भाग देने पर, फल कोटिकला होती है। यहाँ ग्रहण के आरम्भ से मध्यग्रहणपर्यन्त इष्टघटिका होती हैं।
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