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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 17
सम्मीलनोन्मीलनंयो: साधनम्‌ तद्गदेव विमर्दार्धनाडिका - हीनसंयुते । निमीलनोन्मीलनाख्ये भवेतां सकलग्रहे ॥
सम्पूर्ण ग्रहण में, स्पष्टतिथ्यन्तकाल में स्पर्शमर्दार्ध घटी को और मोक्षमर्दार्ध घटी को हीन-युत करने से क्रमश: सम्मीलन और उन्मीलनकाल होते हैं।
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