ग्राह्ममनाधिके तस्मिनू सकल न्यूनमन्यथा ।
योगार्धादधिके न स्याद् विक्षेपे ग्राससम्भव:।।
ग्राह्ममान से ग्रासमान अधिक हो तो सम्पूर्ण ग्रहण और न्यून हो तो न्यून (खण्ड) ग्रहण होता है। मानैक्यार्ध से शर अधिक होने पर ग्रहण सम्भव नहीं होता।
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