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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 4 • श्लोक 1
रविचन्द्रविम्बयो: प्रमाणम्‌ सार्धथानि षट्‌ सहस्लाणि योजनानि विवस्वत: । विष्कम्भो मण्डलस्येन्दो: सहाशीत्या चतुश्शतम्‌ ॥ स्फुटस्वभुक्त्या गुणितौ मध्यभुक्त्योद्धृतौ स्फुटो ।
सूर्यबिम्ब व्यास का प्रमाण ६५०० योजन तथा चन्द्रविम्ब का व्यास प्रमाण ४८० योजन है। इनके व्यास को अपनी अपनी स्पष्टागति से गुणाकर उसमें अपनी अपनी मध्यमागति से भाग देने पर इनके स्पष्ट विम्बव्यास होते हैं।
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