मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 9
अयनांशसाधनम्‌ त्रिंशत॒कृत्यों युगे भानां चक्र प्राद परिलम्बते । तदगुणाद्धूदिनैर्भक्तादू घ्युगणाद्यदवाप्यते ॥
एक महायुग में नक्षत्र चक्र, तीस बार बीस अर्थात्‌ ३० x २० = ६०० बार पूर्व दिशा में परिलम्बित होता है। ६०० से अहर्गण को गुणा कर गुणनफल में युग सावन दिन संख्या से
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें