एक महायुग में नक्षत्र चक्र, तीस बार बीस अर्थात् ३० x २० = ६०० बार पूर्व दिशा में परिलम्बित होता है। ६०० से अहर्गण को गुणा कर गुणनफल में युग सावन दिन संख्या से
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