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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 8
छायात: कणनियनं कर्णतश्छायानयनञ्च॒ शड्कुच्छायाकृतियुतेमूछ॑ कर्णोज्स्य. वर्गतः । प्रोज्म्य शड्कुकृतिं मूलं छाया शड्कुर्विपर्ययात्‌ ॥
शड्कु (१२ अंगुल) और छाया के वर्ग योग का वर्गमूल कर्ण होता है। कर्ण वर्ग से शड्कु वर्ग को घटाकर शेष का वर्गमूल छाया तथा इससे विपरीत अर्थात्‌ कर्ण वर्ग से छाया वर्ग को घटा कर शेष का वर्गमूल शड्कु होता है।
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