पूर्व एवं पश्चिम बिन्दु (पूर्वस्वस्तिक एवं पश्चिम स्वस्तिक) से संलग्न पूर्वापर रेखा सममण्डल (पूर्वापर वृत्त) के धरातल में होती है। ऐसा दैवज्ञों का मत है। वही पूर्वापर रेखा उन्मण्डल में अर्थात् उन्मण्डलवृत्त के धरातल में तथा विषुववृत्त (नाडी वृत्त) के धरातल में भी होती है।
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