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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 51
सूर्यादूने निषाशेषे लग्नेडर्कादधिके दिवा । भचक्रर्धयुतादूभानोरधिकेडस्तमयात्‌. परम्‌ ॥ ॥ सूर्यसिद्धान्ते त्रिप्रश्नाधिकार: सम्पूर्ण: ॥
स्पष्टसूर्य से लग्न न्यून हो तो रात्रिशेष में अर्थात्‌ सूर्योदय से पूर्व का इष्टकाल होगा और अधिक हो तो दिन में अर्थात्‌ सूर्योदय के पश्चात्‌ दिन का इष्टकाल होगा। यदि छ: राशियुकत सूर्य से अधिक लग्न हो तो सूर्यास्त के अनन्तर रात्रि का इष्टकाल होगा।
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