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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 49
प्राकपश्चान्नतनाडीभिस्तस्माल्लड्लेदयासुभि: । भानौ क्षयवने कृत्वा मध्यलग्नं तदा भवेत्‌ ॥
पूर्व-पश्चिम नत घटिका और तात्कालिक सायन सूर्य से लग्नानयन की भाँति लड्डोदयासुओं से साधन करने से जो राश्यादिक फल प्राप्त हो उसको सूर्य में ऋण-धन (पूर्वनत हो तो ऋण पश्चिमनत हो तो धन) करने से मध्यलग्न (दशम लग्न) होगा ।
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