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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 43
क्रमादेकद्वित्रिभज्यास्तच्चापानि पृथक्‌ पृथक । स्वाधोध: परिशोध्याथ मेषाल्लड्लोदयासव: ॥
जो लब्धियाँ प्राप्त हों उनका चाप बनाकर क्रमश: अधोञ्ध: घटाने से मेषादि राशियों के उदयमान होते हैं । यथा - प्रथम फल मेष राशि का दूसरे फल में प्रथम फ़रू को घटाने से वृष राशि का और दूसरे फल को तीसरे फल में घटाने से मिथुन राशि का लड्झोदय मान होगा । मेषराशि के १६७०, वृष राशि के १७९५, मिथुनराशि के १९३५, लड्छोदयासु होते हैं।
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