मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 4
याम्योत्तरदिशोर्मध्ये. _तिमिना पूर्वपश्चिमा । दिड्मध्यमत्स्यै: संसाध्या विदिशस्तद्वदेव हि ।।
याम्योत्तर (दक्षिणोत्तर) रेखाओं (दिशाओं) के बीच तिमि (चापों) द्वारा पूर्वापर (पूर्व से पश्चिम) रेखा का निर्माण कर दोनों (पूर्वापर और दक्षिणोत्तर) रेखाओं के मध्य में विदिशाओं (कोणों में जाने वाली रेखाओं) का निर्माण करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें