इष्टकालिक छाया से त्रिज्या को गुणाकर छायाकर्ण का भाग देने से लब्धि दृग्ज्या होती है। त्रिज्यावर्ग में इस दृग्ज्या का वर्ग घटाकर वर्गमूल लेने से शड्क होता है।
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