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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 35
त्रिज्याभक्ता भवेच्छेदो लम्बज्याघ्नोष्थ भाजित: ॥
इष्टान्त्या को अपने अहोगणात्रवृत्त के व्यासार्ध (द्युज्या) से गुणाकर त्रिज्या का भाग देने से छेद (इष्ट हति) होता है।
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