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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 34
नतकालतश्छायानयनम्‌ त्रिज्योदक्चरजायुक्ता याम्यायां तद्ठविवर्जिता ॥ अन्त्या नतोत्क्रमज्योना स्वाहोरात्रार्द्सड्गुणा ।
उत्तरगोल में त्रिज्या में चरज्या जोड़ने से और दक्षिणगोल में त्रिज्या में चरज्या घटाने से अन्त्या होती है। अन्त्या में नतकाल की उत्क्रमज्या घटाने से शेष, इष्टान्त्या होती है।
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