अग्रा को अभीष्ट कालिक छाया कर्ण से गुणाकर त्रिज्या से भाग देने पर लब्धि अड्गुलादि कर्ण वृत्तीया अग्रा होती है। त्रिज्यावर्ग के आधे से अग्रा का वर्ग घटाकर शेष को १४४ से गुणाकर ७२ युत पलभावर्ग से भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो वह करणी संज्ञक होती है।
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