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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 26
सौम्याक्षोना यदा क्रान्तिः स्यात् तदा द्युदलश्रवः ।। विषुवच्छाययाऽभ्यस्तः कर्णो मध्याग्रयोद्धृतः ।
जब सूर्य की उत्तरा क्रांति अक्षांशों से अल्प होती है तभी सममण्डलगत सूर्य का छायाकर्ण होता है क्योंकि उसी स्थिति में सूर्य सममण्डल में प्रवेश करेगा। दक्षिणक्रांति होने पर अथवा अभक्षांशों से क्रांति अधिक होने पर स्वक्षितिज के उपर सूर्य का सममण्डल में प्रवेश सम्भव नहीं होता। प्रकारान्‍्तर से सममण्डल कर्ण का साधन - मध्याहनकर्ण को पलभा से गुणाकर मध्याग्रा का भाग देने से सममण्डल कर्ण होता है।
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