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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 25
लम्बाक्षजीवे विषुवच्छायाद्वादशसदगुणे ॥ क्रान्तिज्याप्ते तु तौ कर्णों सममण्डलगे रवौ ।
लम्बज्या और अक्षज्या को क्रम से पलभा और द्वादश से गुणाकर क्रान्तिज्या का भाग देने से प्राप्त लब्धियाँ सममण्डल छायाकर्ण होती हैं।
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