क्रान्तिज्या को पलकर्ण से गुणाकर द्वादश का भाग देने से अर्काग्रा होती है इस अर्काग्रा को इष्टकालिक छायाकर्ण से गुणाकर मध्यकर्ण अर्थात् त्रिज्या से भाग देने पर स्वकर्णाग्रा होती है।
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