उस वृत्त के मध्य में १२ अंगुल का एक : शड्कु स्थापित करें। इस शड्कु का छायाग्र वृत्तपरिधि को पूर्वाहन में तथा अपराहन में जहाँ स्पर्श करे उन स्थानों पर बिन्दु बनावें।
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