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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 2
तन्मध्ये स्थापयेच्छड्कुं कल्पनाद्वादशाडगुलम्‌ । तच्छायाग्रं स्पृशेद्यत्र॒ वृत्ते पूर्वापरार्द्धयो:॥
उस वृत्त के मध्य में १२ अंगुल का एक : शड्कु स्थापित करें। इस शड्कु का छायाग्र वृत्तपरिधि को पूर्वाहन में तथा अपराहन में जहाँ स्पर्श करे उन स्थानों पर बिन्दु बनावें।
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