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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 19
ककंदि प्रोज्ञझब चक्रार्धात्‌ तुलादौ भार्धसंयुतात्‌ । मृगादौ प्रोज्ञय भगणान्मध्याहने्र्क: स्फुटो भवेत्‌ ॥
गणितागत स्फुट सूर्य से मन्दफल का साधन कर उस का स्पष्ट सूर्य में विलोम॑ संस्कार करें पुन: संस्कृत सूर्य से मन्दफल साधन कर स्पष्ट सूर्य में विलोम संस्कार करें। इस प्रकार असकृत्‌ (बार-बार) संस्कार करने से अहर्गणोत्पन्न मध्यम सूर्य होगा।
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