दिग्भेदेष्पक्रम: शेषस्तस्य ज्या त्रिज्यया हता।
परमापक्रमज्याप्ता चाप॑ मेषादिगो रवि:॥
क्रान्तिज्या को त्रिज्या से गुणाकर परमक्रान्तिज्या से भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो उसका चाप मेषादि तीन राशियों में सायन सूर्य होता है। कर्कादि तीन राशियों में लब्धि को छ: राशि से घटाने से, तुलादि तीन राशियों में छ: राशि में जोड़ने से तथा मकरादि तीन राशियों में द्वादश से घटाने पर शेष मध्याहन कालिक स्पष्ट सायन सूर्य होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।