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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 18
दिग्भेदेष्पक्रम: शेषस्तस्य ज्या त्रिज्यया हता। परमापक्रमज्याप्ता चाप॑ मेषादिगो रवि:॥
क्रान्तिज्या को त्रिज्या से गुणाकर परमक्रान्तिज्या से भाग देने से जो लब्धि प्राप्त हो उसका चाप मेषादि तीन राशियों में सायन सूर्य होता है। कर्कादि तीन राशियों में लब्धि को छ: राशि से घटाने से, तुलादि तीन राशियों में छ: राशि में जोड़ने से तथा मकरादि तीन राशियों में द्वादश से घटाने पर शेष मध्याहन कालिक स्पष्ट सायन सूर्य होता है।
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