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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 16
दिगभेदे मिश्रिता: साम्ये विश्लिष्टाश्वाक्षलिप्तिका: । ताभ्योऊक्षज्या च तद्वर्ग प्रोज्ञब त्रिज्याकृते: पदम्‌ ॥ लम्बज्याऊर्कगुणाक्षज्या विषुवद्धाइ्थ लम्बया ।
यक्त अक्षांश से अक्षज्या साधित कर उसके वर्ग को त्रिज्या के वर्ग में घटा कर शेष का वर्गमूल लेने से लम्बज्या होती है। अक्षज्या को १२ से गुणाकर लम्बज्या से भाग देने पर लब्ध फल पलभा होती है।
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