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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 14
मध्याहनछाययाक्षांशलम्बांशपलभानां ज्ञानम्‌ मध्यच्छाया भुजस्तेन गुणिता त्रिभमौर्विका ॥
मध्याहनकाल में सूर्य की छाया (मध्याहनकालिक शड्कु की छाया) भुजसंत़्क होती है। उस छाया (भुज) से त्रिज्या को गुणाकर गुणनफल में मध्याहन कालिक छाया कर्ण से भाग देने पर जो लब्धि प्राप्त हो उसकी चापकला मध्याहनकालिक नतांश होती है। यदि छाया (भुज) पूर्वापर सूत्र से दक्षिण हो तो उत्तर नतांश तथा यदि छाया उत्तर दिशा में हो तो दक्षिण नतांश होता है। (उत्तर भुज में दक्षिणनतांश, दक्षिणभुज में उत्तर नतांश होता है।)
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