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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 12
अन्तरांशैरथावृत्य पश्चाच्छेषेस्तथाधिके । एवं विषुवती छाया स्वदेशे या दिनाद्धजा ॥ दक्षिणोत्तररेखायां सा तत्र विषुवत्मभा ।
तथा यदि गणितागत सूर्य का भोगांश अधिक, है तो अन्तरांश तुल्य नक्षत्र चक्र पश्चिम दिशा में चला है ऐसा समझें। इस प्रकार अपने-अपने देश (स्थान) में मध्याहन कालिक दक्षिणोत्तर रेखा में पड़ने वाली विषुवच्छाया (१२ अंगुल शड्कु की छाया) उस स्थान की पलभा होती है।
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