दोनों अयन बिन्दुओं (सायन कर्क एवं सायन मकर) तथा दोनों विषुव (सायन मेष और सायन तुला) बिन्दुओं पर सूर्य के संक्रमण (संक्रान्ति) के समय अयन चलन (आयन सम्पात की गति) स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। छायार्क (वेधोपलब्ध सूर्य) से गणितागत सूर्य (सूर्य का भोगांश) अल्प होने पर अन्तरांश तुल्य सम्पात से भचक्र पूर्व की ओर चला है।
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