मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 11
अयनचलनस्य ट्ृक्‍्प्रतीति स्फुटं दृकतुल्यतां गच्छेदयने विषुवद्धये । प्राक चक्रं चलितं हीने छायाकात्‌ करणागते ॥
दोनों अयन बिन्दुओं (सायन कर्क एवं सायन मकर) तथा दोनों विषुव (सायन मेष और सायन तुला) बिन्दुओं पर सूर्य के संक्रमण (संक्रान्ति) के समय अयन चलन (आयन सम्पात की गति) स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। छायार्क (वेधोपलब्ध सूर्य) से गणितागत सूर्य (सूर्य का भोगांश) अल्प होने पर अन्तरांश तुल्य सम्पात से भचक्र पूर्व की ओर चला है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें