मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 10
तद्दोस्त्रिष्णा दशाप्तांशा विज्ञेया अयनाभिधा: । तत्सस्कृतांदग्रहात्‌ क्रान्तिच्छायाचरदलादिकम्‌ ॥
भाग देने पर प्राप्त लब्धि का भुज बनाकर ३ से गुणा कर उसमें १० का भाग देने से अयबांश होता है। इस अयनांश संस्कृत ग्रह (सायनग्रह) द्वारा क्रान्ति, छाया, चरखण्ड आदि का साधन करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
सूर्य सिद्धांत के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

सूर्य सिद्धांत के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें