भाग देने पर प्राप्त लब्धि का भुज बनाकर ३ से गुणा कर उसमें १० का भाग देने से अयबांश होता है। इस अयनांश संस्कृत ग्रह (सायनग्रह) द्वारा क्रान्ति, छाया, चरखण्ड आदि का साधन करना चाहिये।
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