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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 3 • श्लोक 1
स्फुटदिगूज्ञानममाह शिलातलेम्बुसंशुद्धे वज्ललेपेजपि वा समे । तत्र शडक्वडगुलैरिष्टे: सम॑ मण्डलमालिखेत्‌ ।।
जल के द्वारा संशोधित पत्थर की शिलातल पर अथवा वज्लेप (सीमेन्ट या अन्य मसालों) से: बने समतल चबूतरे पर शड्कु के अनुसार अर्थात्‌ अड्ग्गुल के अर्द्धव्यास से वृत्त बनावें।
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