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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 8
बुध शुक्रयो: वेशिष्ट्यम्‌ बुधभार्गवयो: शीघ्रात्‌ तद्बत्‌ पातो यदा स्थित: । तच्छीघप्राकर्षणात्‌ तौ तु विक्षिप्येते यथोक्‍्तवत्‌ ॥
बुध और शुक्र के शीघ्रोच्चों से इनके पात (बुध और शुक्र के विमण्डल और क्रान्तिमण्डल के सम्पात) पूर्वोक्त नियमानुसार पूर्व दिशा में यदि ६ राशि से अल्प दूरी पर हों तथा पश्चिम दिशा में भी ६ राशि से अल्प हों तो क्रम से उत्तर एवं दक्षिण में आकर्षित करता है।
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