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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 69
तिथ्यर्धभोगं सर्वेषां करणानां प्रकल्पयेत्‌ । एषा स्फूटगति: प्रोक्ता सूर्यादीनां खचारिणाम्‌ ॥ इति श्रीसकलगणकसार्वभौमवलाल्लदैवज्ञात्मज-रड्रनाथगणकविरचिते गूढ़ार्थ प्रकाशके स्पष्टाधिकार: पूर्ण: ॥
प्रयेक करण का भोगमान तिदथ्यर्ध तुल्य होता है अर्थात्‌ एक तिथि में दो करण होते हैं। इस प्रकार सूर्यादि ग्रहों की स्पष्टगति कही गई।
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