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सूर्य सिद्धांत • अध्याय 2 • श्लोक 66
अकॉनिचन्द्रलिप्तास्तु तिथयो भोगभाजिता: । गता गम्याश्च षष्टिघ््यो नाडयो भुक्‍्त्यन्तरोद्धृता: ॥
सूर्य रहित चन्द्रमा की कला को तिथि भोग ७२० कला से भाग देने पर लब्धि गततिथि होती है। शेष को ६० से गुणाकर रवि-चन्द्र गत्यन्तर से भाग देने पर वर्तमान तिथि का गतगम्य मान होता है अर्थात्‌ स्पष्टचन्द्रमा के राश्यादि मान से स्पष्ट सूर्य के राश्यादि मान को घटाकर शेष की कला में ७२० का भाग देने पर लब्धि गत तिथि तथा शेष वर्तमान तिथि की गतकला होती है। गाल को ७२० में घटाने से शेष एष्य कला होती है। गतकला को ६० से गुणाकर रविचन्द्र की गत्यन्तर कला से भाग देने पर गत मान तथा ऐष्य कला को ६० से गुणा कर गत्यन्तर कला से भाग देने पर ऐष्य मान होता है।
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